जन्म नक्षत्र खोजक: नक्षत्र, चरण व स्वामी ग्रह | AstroLeaf
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वैदिक नक्षत्र कैलकुलेटर

अपनी जन्म कुंडली के आधार पर जन्म नक्षत्र, चरण, अधिष्ठाता देवता और सभी 9 ग्रहों के नक्षत्रों की सटीक गणना करें।

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अपना जन्म नक्षत्र और सभी ग्रहों की नक्षत्र स्थिति जानने के लिए सटीक समय और स्थान दर्ज करें।

वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का महत्व एवं जन्म नक्षत्र का प्रभाव

आपका जन्म नक्षत्र (जन्म तारा) उस विशिष्ट चंद्र नक्षत्र को दर्शाता है जहाँ आपके जन्म के सटीक क्षण पर चंद्रमा गोचर कर रहा था। पाश्चात्य ज्योतिष मुख्यतः सूर्य राशि पर ध्यान केंद्रित करता है, किंतु वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को सर्वोपरि स्थान प्राप्त है क्योंकि चंद्रमा मनुष्य के मन, अवचेतन प्रवृत्तियों और मूल स्वभाव का स्वामी है। जिस नक्षत्र में चंद्रमा स्थित होता है, वह आपके संपूर्ण जीवन की विचार प्रक्रिया और भावनात्मक स्पंदन को निर्धारित करता है।

जन्म नक्षत्र की गणना के लिए सटीक जन्म समय और जन्म स्थान के अक्षांश-देशांतर आवश्यक होते हैं। यह कैलकुलेटर निरयण चित्रापक्ष लाहिड़ी अयनांश के आधार पर चंद्रमा की वास्तविक खगोलीय स्थिति का मापन करता है। इससे आपका जन्म नक्षत्र, चरण, नक्षत्र स्वामी और अधिष्ठाता देवता की सटीक जानकारी प्राप्त होती है, जो विंशोत्तरी महादशा और गुण मिलान का मुख्य आधार बनती है।

संपूर्ण 27 नक्षत्र संदर्भ तालिका एवं प्रतीक विवरण

नीचे दी गई संदर्भ तालिका में वैदिक ज्योतिष के सभी 27 नक्षत्रों का राशि विस्तार, अधिष्ठाता देवता, नक्षत्र स्वामी ग्रह और उनके पारंपरिक प्रतीकों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है:

# नक्षत्र राशि विस्तार अधिष्ठाता देवता नक्षत्र स्वामी मुख्य प्रतीक
1अश्विनी00°00' - 13°20' मेषअश्विनी कुमारकेतुअश्व मुख (घोड़े का सिर)
2भरणी13°20' - 26°40' मेषयमशुक्रयोनि / त्रिकोण
3कृत्तिका26°40' मेष - 10°00' वृषभअग्निसूर्यउस्तरा / ज्वाला
4रोहिणी10°00' - 23°20' वृषभब्रह्माचंद्ररथ / छकड़ा गाड़ी
5मृगशिरा23°20' वृषभ - 06°40' मिथुनसोम (चंद्र)मंगलहिरण का सिर
6आर्द्रा06°40' - 20°00' मिथुनरुद्रराहुअश्रु बिंदु / हीरा
7पुनर्वसु20°00' मिथुन - 03°20' कर्कअदितिगुरुधनुष और बाणों का तरकश
8पुष्य03°20' - 16°40' कर्कबृहस्पतिशनिकमल / गाय का थन
9आश्लेषा16°40' - 30°00' कर्कसर्प (नाग)बुधकुंडलित सर्प
10मघा00°00' - 13°20' सिंहपितरकेतुराज सिंहासन / पालकी
11पूर्वा फाल्गुनी13°20' - 26°40' सिंहभगशुक्रशय्या के अगले पाये
12उत्तरा फाल्गुनी26°40' सिंह - 10°00' कन्याअर्यमासूर्यशय्या के पिछले पाये
13हस्त10°00' - 23°20' कन्यासविता (सूर्य)चंद्रखुली हथेली / मुट्ठी
14चित्रा23°20' कन्या - 06°40' तुलाविश्वकर्मामंगलचमकता मोती / रत्न
15स्वाति06°40' - 20°00' तुलावायुराहुपवन में लहराता अंकुर / प्रवाल
16विशाखा20°00' तुला - 03°20' वृश्चिकइंद्राग्निगुरुतोरण द्वार / कुम्हार का चाक
17अनुराधा03°20' - 16°40' वृश्चिकमित्रशनिकमल पुष्प / छड़ी
18ज्येष्ठा16°40' - 30°00' वृश्चिकइंद्रबुधकुंडल / गोल ताबीज
19मूल00°00' - 13°20' धनुनिऋतिकेतुजड़ों का गुच्छा / अंकुश
20पूर्वाषाढ़ा13°20' - 26°40' धनुअपः (जल)शुक्रहाथ का पंखा / सूप
21उत्तराषाढ़ा26°40' धनु - 10°00' मकरविश्वेदेवसूर्यहाथी का दांत / छोटा मंच
22श्रवण10°00' - 23°20' मकरविष्णुचंद्रतीन पदचिह्न / कान
23धनिष्ठा23°20' मकर - 06°40' कुंभअष्ट वसुमंगलमृदंग / बांसुरी
24शतभिषा06°40' - 20°00' कुंभवरुणराहुसौ तारों का वृत्त / चक्र
25पूर्वाभाद्रपद20°00' कुंभ - 03°20' मीनअजैकपादगुरुदो मुखी तलवार / मंच
26उत्तराभाद्रपद03°20' - 16°40' मीनअहिरबुध्न्यशनिगहरे जल का सर्प / जुड़वां
27रेवती16°40' - 30°00' मीनपूषाबुधमछली की जोड़ी / मृदंग

नक्षत्र चरण और नवमांश (D9) का संबंध

प्रत्येक नक्षत्र 13° 20' (13 अंश 20 कला) का होता है, जिसे चार समान भागों में बांटा गया है जिन्हें चरण कहा जाता है। प्रत्येक चरण 3° 20' (3 अंश 20 कला) का होता है। एक चरण ठीक एक नवमांश के बराबर होता है। इस प्रकार 27 नक्षत्र मिलकर 108 चरणों का निर्माण करते हैं, जो संपूर्ण 12 राशियों के 108 नवमांशों के अनुरूप होते हैं।

जब जन्म का चंद्रमा या लग्न जल तत्व राशि और अग्नि तत्व राशि की संधि पर स्थित होता है (जैसे कर्क-सिंह, वृश्चिक-धनु, मीन-मेष की संधि), तो उसे गंडांत मूल नक्षत्र कहा जाता है। इन संवेदनशील चरणों में बैठे ग्रह जातक के जीवन में गहन रूपांतरणकारी पाठ लेकर आते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्म नक्षत्र गणना और वैदिक फलादेश से जुड़े महत्वपूर्ण समाधान।

जन्म नक्षत्र 27 वैदिक नक्षत्रों में से वह विशिष्ट तारा मंडल है, जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा संचरण कर रहा था। यह आपके मूल स्वभाव, मानसिक प्रवृत्तियों और 120 वर्षीय विंशोत्तरी महादशा की प्रारंभिक दशा शेष का निर्धारण करता है।

चंद्र नक्षत्र जहां मानसिक प्रवृत्तियों और दशा चक्र का निर्धारण करता है, वहीं सूर्य, लग्न और अन्य ग्रहों के नक्षत्र यह स्पष्ट करते हैं कि करियर, वाणी, धन और स्वास्थ्य जैसे विशिष्ट जीवन क्षेत्र किस प्रकार कार्य करेंगे।

आपके जन्म नक्षत्र का स्वामी ग्रह आपकी प्रथम महादशा का अधिपति बनता है। चंद्रमा द्वारा उस नक्षत्र में तय किए गए और शेष बचे भोगांश के अनुपात से जन्म कालीन महादशा की प्रारंभिक शेष अवधि (वर्ष, माह, दिन) निकाली जाती है।

चंद्र राशि आकाश के 30 अंश के विस्तृत क्षेत्र को दर्शाती है, जबकि नक्षत्र 13 अंश 20 कला का एक सूक्ष्म चंद्र खंड होता है। नक्षत्र चंद्र राशि की तुलना में स्वभाव, मानसिक प्राथमिकताओं और समय चक्र की कहीं अधिक गहरी जानकारी प्रदान करता है।