वैदिक काल गणना और मुहूर्त ज्योतिष में, चौघड़िया दिन और रात के अनुकूल तथा प्रतिकूल समय कालखंडों की पहचान करने वाली एक अत्यंत प्रामाणिक गणितीय पद्धति है। यह शब्द "चौ" (चार) और "घटी" (24 मिनट की प्राचीन वैदिक समय इकाई) से मिलकर बना है। शास्त्रीय रूप से, एक चौघड़िया 4 घटी यानी ठीक 96 मिनट का होता था।
व्यवहार में, दिन के समय को (स्थानीय सूर्योदय से स्थानीय सूर्यास्त तक) 8 बराबर भागों में और रात के समय को (स्थानीय सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक) 8 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। विभिन्न ऋतुओं में दिनमान घटने-बढ़ने के कारण, अपने सटीक अक्षांश और देशांतर के आधार पर सूर्योदय-सूर्यास्त की गणना करना अत्यंत आवश्यक है।