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अमावस्या 2026 तिथियां व तर्पण समय

अपने शहर के लिए वर्ष 2026 की सभी अमावस्या तिथियां, सूर्य ग्रहण समय और पितृ तर्पण व श्राद्ध के शुभ मुहूर्त देखें।

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वैदिक ज्योतिष में अमावस्या क्या है: दर्श, सिनीवाली और कुहू अवस्थाएं

वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष शास्त्र) में, अमावस्या चंद्र मास की तीसवीं और अंतिम तिथि होती है। यह उस सटीक खगोलीय स्थिति को दर्शाती है जब सूर्य और चंद्रमा एक ही आकाशीय देशांतर (0 अंश अलगाव) पर स्थित होते हैं। संस्कृत शब्द "अमा" का अर्थ है "एक साथ" और "वस्या" का अर्थ है "निवास करना", जो एक ही राशि में दो प्रमुख ज्योतियों (सूर्य व चंद्र) के संयोजन को दर्शाता है।

प्राचीन वैदिक ग्रंथों जैसे तैत्तिरीय संहिता, ऋग्वेद और सूर्य सिद्धांत में अमावस्या को तीन प्रमुख खगोलीय एवं अनुष्ठानिक श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  • दर्श अमावस्या: यह 30वीं तिथि के प्रथम भाग में होती है जब चंद्रमा की एक अत्यंत सूक्ष्म कला सूर्य के पूर्ण संयोग से पहले खगोलीय रूप से अभी भी विद्यमान रहती है। यह पितरों की प्रारंभिक प्रार्थना हेतु अत्यंत उत्तम मानी जाती है।
  • सिनीवाली अमावस्या: जब चंद्रमा दिन और रात पूर्णतः अदृश्य व अंधकारमय रहता है। देवी सिनीवाली के नाम पर यह अवस्था गहन ध्यान और पितृ तर्पण हेतु सर्वोत्तम मानी गई है।
  • कुहू अमावस्या: पूर्ण चंद्र विलोपन की अंतिम अवस्था जब चंद्रमा सूर्य की किरणों में पूर्णतः समाहित हो जाता है और शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का उदय होने वाला होता है।

जहां पूर्णिमा बाह्य ऊर्जा व उत्सव का प्रतीक है, वहीं अमावस्या आत्मचिंतन, मानसिक शुद्धि और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है।

सोमवती अमावस्या, शनि अमावस्या एवं भौमवती अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

जब अमावस्या विशिष्ट वारों के साथ संयोग करती है, तो इसका ज्योतिषीय प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

  • सोमवती अमावस्या (सोमवार): सोमवार चंद्र देव और भगवान शिव को समर्पित है। जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है, तो यह जन्म कुंडली में चंद्र दोष, मानसिक तनाव व अनिद्रा निवारण का दुर्लभ अवसर बनाती है। इस दिन पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा कर कच्चा सूत लपेटने से अखंड सौभाग्य व मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
  • शनि अमावस्या (शनिवार): शनिवार कर्मफलदाता शनि देव का दिन है। शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या शनि साढ़ेसाती, ढैय्या और वक्री शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति का श्रेष्ठ अवसर है। इस दिन संध्याकाल में सरसों का तेल, काले तिल, उड़द और लोहे की वस्तुओं का दान शुभ फल देता है।
  • भौमवती अमावस्या (मंगलवार): मंगलवार मंगल देव को समर्पित है। इस दिन अमावस्या पड़ने से ऋण मुक्ति, भूमि विवाद और पारिवारिक कलह से शांति मिलती है। हनुमान चालीसा का पाठ एवं लाल मसूर का दान करना विशेष शुभ माना गया है।

अमावस्या पर पितृ तर्पण, श्राद्ध एवं पितृ दोष निवारण उपाय

वैदिक सनातन परंपरा के अनुसार प्रत्येक मनुष्य पर तीन प्रमुख ऋण होते हैं: देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। अमावस्या पितृ ऋण से मुक्ति और पितृ दोष निवारण का सर्वश्रेष्ठ मासिक पर्व है।

गरुड़ पुराण और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अमावस्या के दिन पितृलोक में सूर्य का प्रकाश रहता है और पूर्वज अपने वंशजों से तर्पण व तृप्ति की अपेक्षा में भूलोक के निकट आते हैं:

  • अपराह्न काल का समय: पितरों का तर्पण सदैव दोपहर (अपराह्न काल) में, विशेष रूप से कुतुप मुहूर्त (लगभग 11:45 AM से 12:35 PM) और रौहिण मुहूर्त में ही करना चाहिए। प्रातःकाल या रात्रि में तर्पण वर्जित है।
  • तर्पण सामग्री: गंगाजल मिश्रित शुद्ध जल, काले तिल, कुश की पवित्री (अंगूठी), जौ, श्वेत पुष्प और तांबे या पीतल का पात्र।
  • पंचबलि कर्म: भोजन से पूर्व पांच आहुतियां/भाग निकाले जाते हैं: गो-बलि (गाय), काक-बलि (कौआ), श्वान-बलि (कुत्ता), पिपीलिका-बलि (चींटी) और देव/ब्राह्मण भाग।

अमावस्या पर नए मांगलिक कार्य क्यों वर्जित हैं और आध्यात्मिक साधना क्यों श्रेष्ठ है?

मुहूर्त शास्त्र में अमावस्या को पक्ष बल से हीन तिथि माना गया है। जन्म कुंडली एवं मुहूर्त में चंद्रमा मन, भावनात्मक स्थिरता, जल तत्व और जनसमर्थन का कारक है।

अमावस्या पर चंद्रमा का प्रकाश शून्य प्रतिशत (0%) होता है, जिससे बाह्य सांसारिक ऊर्जा क्षीण रहती है:

  • वर्जित कार्य: नए व्यापार का आरंभ, संपत्ति रजिस्ट्री, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार, नया वाहन क्रय और लंबी यात्राएं। इस दिन शुरू किए गए भौतिक कार्यों में जनसमर्थन की कमी या मानसिक असंतोष देखा जाता है।
  • प्रशस्त कार्य: ध्यान, प्राणायाम, मंत्र दीक्षा, मानसिक शुद्धि, उपवास और गुप्त दान। बाह्य चंद्र उत्तेजना के अभाव में यह दिन आत्मिक साक्षात्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

अमावस्या व्रत नियम, पूजा विधि एवं शुभ समय

अमावस्या का व्रत रखने से मानसिक विकार दूर होते हैं और शारीरिक पाचन तंत्र शुद्ध होता है:

  • प्रातः संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल या तिल मिले जल से स्नान करें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके पितरों की तृप्ति और आत्मशांति का संकल्प लें।
  • आहार नियम: निर्जला या फलाहारी व्रत रखें। अन्न, दालें, प्याज-लहसुन, तामसिक भोजन व मदिरा का पूर्ण त्याग करें।
  • संध्या पूजा: शाम को पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र या शिव पंचाक्षर स्तोत्र का 108 बार जप करें।

अमावस्या बनाम पूर्णिमा: ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संतुलन

चंद्र मास अमावस्या और पूर्णिमा के दो विपरीत छोरों के बीच निरंतर गतिशील रहता है:

कारक अमावस्या (नवचंद्र) पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र)
चंद्र प्रकाश 0% (पूर्ण अंधकार) 100% (पूर्ण प्रकाशित)
ग्रह युति सूर्य-चंद्र 0° पर युति सूर्य-चंद्र 180° पर दृष्टि
गुण प्रभाव तम से अंतर्मुखी सत्व सक्रिय सत्व एवं रजस
मानसिक भाव विसर्जन, विश्राम, आत्मसमर्पण प्रकटीकरण, उत्सव, आनंद
प्रमुख अनुष्ठान पितृ तर्पण, श्राद्ध, दान सत्यनारायण कथा, लक्ष्मी पूजा
भौतिक मुहूर्त सांसारिक कार्यों में वर्जित नए कार्यों हेतु प्रशस्त

स्थानीय सूर्योदय और देशांतर के आधार पर वैश्विक तिथियों में अंतर

न्यूयॉर्क, लंदन, नई दिल्ली और सिडनी में अमावस्या की तिथि व व्रत के दिन में अंतर क्यों होता है:

  • सार्वभौमिक युति बनाम स्थानीय तिथि: सूर्य-चंद्र का 0° पर संयोग UTC में पूरे विश्व में एक ही क्षण घटित होता है। परंतु स्थानीय घड़ियों में समय देशांतर के अनुसार अलग होता है।
  • उदया तिथि सिद्धांत: वैदिक पंचांग में पर्व या व्रत का निर्धारण स्थानीय सूर्योदय (सूर्य उदया) के समय उपस्थित तिथि से होता है। देशांतर भेद के कारण जो तिथि भारत में सूर्योदय पर है, वह पश्चिम के देशों में पहले ही समाप्त हो सकती है।
  • अपराह्न व्यापिनी नियम: पितृ तर्पण हेतु अमावस्या का अपराह्न काल में होना अनिवार्य है। AstroLeaf आपके विशिष्ट शहर के अक्षांश-देशांतर के आधार पर स्थानीय गणना करता है।

वर्ष की 12 अमावस्याओं का संक्षिप्त परिचय एवं महत्व

हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक चंद्र मास की अमावस्या का अपना विशिष्ट आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व है:

  • 1. चैत्र अमावस्या (मार्च-अप्रैल): हिंदू नववर्ष की पूर्व संध्या, जो चैत्र नवरात्रि के आगमन की तैयारी का प्रतीक है।
  • 2. वैशाख अमावस्या (अप्रैल-मई): दर्श अमावस्या से संबंधित, जिसमें गर्मी से राहत हेतु जल पात्र (मटके) का दान पुण्यकारी माना जाता है।
  • 3. ज्येष्ठ अमावस्या (मई-जून): शनि देव की जयंती (शनि जयंती) एवं सौभाग्यदायिनी वट सावित्री व्रत का महापर्व।
  • 4. आषाढ़ अमावस्या (जून-जुलाई): हलहारिणी अमावस्या; कृषि उपकरणों एवं धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन।
  • 5. श्रावण अमावस्या (जुलाई-अगस्त): हरियाली अमावस्या; भगवान शिव एवं प्रकृति पूजन हेतु पीपल और बरगद के वृक्षों को जल अर्पित करने का दिन।
  • 6. भाद्रपद अमावस्या (अगस्त-सितंबर): पिठोरी अमावस्या; संतान के दीर्घायु व आरोग्य हेतु 64 योगिनियों का पूजन व व्रत।
  • 7. आश्विन अमावस्या (सितंबर-अक्टूबर): महालया / सर्वपितृ अमावस्या; वर्ष का सबसे बड़ा पितृ दिवस, जब सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों को विदाई तर्पण दिया जाता है।
  • 8. कार्तिक अमावस्या (अक्टूबर-नवंबर): विश्वप्रसिद्ध दीपावली महापर्व; मां लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश का पूजन एवं दीपदान।
  • 9. मार्गशीर्ष अमावस्या (नवंबर-दिसंबर): शीत ऋतु के प्रारंभ में अंतर्मुखी साधना एवं पितृ तर्पण का शुभ दिन।
  • 10. पौष अमावस्या (दिसंबर-जनवरी): प्रयागराज संगम स्नान एवं गर्म वस्त्रों व तिल-गुड़ के दान का विशेष महत्व।
  • 11. माघ अमावस्या (जनवरी-फ़रवरी): मौनी अमावस्या; हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्नान दिनों में से एक, जिसमें मौन व्रत का पालन किया जाता है।
  • 12. फाल्गुन अमावस्या (फ़रवरी-मार्च): महाशिवरात्रि एवं होलिका दहन की पूर्व पीठिका, जो पितृ शांति हेतु अत्यंत शुभ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमावस्या, पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म और अमावस्या के खगोलीय व ज्योतिषीय महत्व से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर।

अमावस्या हिंदू चंद्र मास की 30वीं तिथि होती है, जो उस क्षण घटित होती है जब सूर्य और चंद्रमा का आकाशीय देशांतर एक समान (0° अलगाव) हो जाता है। वैदिक ज्योतिष में यह सूर्य (आत्मा) और चंद्रमा (मन) के दिव्य मिलन का प्रतीक है, जो कृष्ण पक्ष की समाप्ति और शुक्ल पक्ष के आरंभ को चिन्हित करती है।

प्राचीन वैदिक ग्रंथों के अनुसार: दर्श अमावस्या 30वीं तिथि के प्रथम भाग में होती है जब चंद्रमा की एक अत्यंत सूक्ष्म रेखा खगोलीय रूप से दिखाई देती है। सिनीवाली अमावस्या वह अवस्था है जब चंद्रमा पूरे दिन और रात पूरी तरह अंधकारमय रहता है। कुहू अमावस्या सूर्योदय से पूर्व की वह अंतिम अवस्था है जब चंद्रमा सूर्य के प्रकाश में पूर्णतः विलीन हो जाता है।

सूर्य सिद्धांत और गरुड़ पुराण के अनुसार, चंद्रमा का कृष्ण पक्ष पितृलोक के दिन के समान होता है। अमावस्या पर भौतिक संसार और पितृलोक के बीच का आध्यात्मिक द्वार खुलता है, जिससे पूर्वज अपने वंशजों द्वारा दिए गए जल (तर्पण), काले तिल और अन्न (पिंडदान) को सीधे सौर किरणों के माध्यम से ग्रहण करते हैं।

सोमवती अमावस्या (सोमवार) भगवान शिव और चंद्र को समर्पित है, जो पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा से मानसिक अवसाद और चंद्र दोष से मुक्ति देती है। शनि अमावस्या (शनिवार) सरसों के तेल के दान से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों को शांत करती है। भौमवती अमावस्या (मंगलवार) ऋण मुक्ति और भूमि विवादों के समाधान में अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

मुहूर्त शास्त्र में चंद्रमा को पक्ष बल (मानसिक व जीवन शक्ति) का आधार माना गया है। अमावस्या पर चंद्र प्रकाश शून्य प्रतिशत होने से सांसारिक कार्यों में उत्साह व स्थायित्व की कमी रहती है। भौतिक विस्तार के लिए इसे त्यागकर आंतरिक शुद्धि, ध्यान व दान-पुण्य हेतु उपयोग किया जाता है।

पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म सदैव अपराह्न काल (दोपहर लगभग 1:15 PM से 3:45 PM के बीच), विशेषकर कुतुप और रौहिण मुहूर्त में ही संपन्न किए जाने चाहिए। जबकि ध्यान, शिव पूजा और साधना प्रदोष काल (सूर्यास्त) या निशीथ काल (मध्यरात्रि) में की जाती है।

प्रातः तिल या पवित्र जल से स्नान करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें, तामसिक भोजन से दूर रहें और फलाहार या निर्जला उपवास रखें। भोजन ग्रहण करने से पूर्व पंचबलि (गाय, कौवे, कुत्ते, चींटी और साधक हेतु अन्न) निकालना अनिवार्य है।

पूर्णिमा अधिकतम विस्तार, तीव्र भावनात्मक प्रकटीकरण और सात्विक बाह्य ऊर्जा का प्रतीक है। इसके विपरीत, अमावस्या शून्य-बिंदु विसर्जन, आंतरिक मानसिक विश्राम, अवचेतन शुद्धि और गहन ध्यानस्थ मौन का प्रतीक है।

सूर्य-चंद्र युति UTC में एक निश्चित खगोलीय क्षण है, परंतु नागरिक कैलेंडर में तिथि स्थानीय समय क्षेत्र और स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करती है। यदि अमावस्या तिथि भारत में सूर्योदय से पहले प्रारंभ होती है लेकिन न्यूयॉर्क में सूर्योदय के बाद, तो व्रत का दिन अलग हो सकता है।

हमारा इंजन स्विस एफिमेरिस और सटीक खगोलीय सूत्रों का उपयोग करता है। यह उस सटीक क्षण की गणना करता है जब सूर्य-चंद्र का कोणीय अंतर 348° (30वीं तिथि आरंभ) और 360° (संयोग/समाप्ति) को पार करता है, और इसे आपके स्थानीय शहर के निर्देशांकों में रूपांतरित करता है।

स्थान अनुसार अमावस्या

प्रमुख तीर्थों एवं शहरों के लिए अमावस्या तिथियां

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