रक्षाबंधन 2026 | भद्रा काल समय & राख� | AstroLeaf

रक्षाबंधन 2026: भद्रा काल समय, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, विधि एवं ज्योतिषीय महत्व

लेखक: ज्योतिषीय विशेषज्ञ · प्रकाशित: 14 अगस्त 2026 (शुक्रवार) | अंतिम अपडेट: 14 सितंबर 2026 (सोमवार) · 7 मिनट पठन
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रक्षाबंधन भाई और बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के पावन संकल्प का प्रतीक पर्व है। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाए जाने वाले इस पावन दिन पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई उनकी आजीवन रक्षा का वचन देते हैं। वर्ष 2026 में भद्रा काल की समाप्ति, राखी बांधने के श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त, पूजा थाली की सजावट और राशि-वार रक्षा सूत्र के शुभ रंगों की संपूर्ण जानकारी देखें।

रक्षाबंधन में भद्रा काल का त्याग क्यों अनिवार्य है?

शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि भद्रा काल के दौरान राखी बांधना अथवा होलिका दहन करना पूर्णतः वर्जित है। भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन हैं, जिनका स्वभाव उग्र माना गया है। मान्यता है कि रावण की बहन शूर्पणखा ने रावण को भद्रा काल में ही रक्षा सूत्र बांधा था, जिससे रावण के कुल का विनाश हो गया था। इसलिए भद्रा पुच्छ या भद्रा की समाप्ति के उपरांत ही शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जानी चाहिए।

रक्षाबंधन पूजन विधि एवं रक्षा सूत्र मंत्र

पूजा की थाली में रोली, चंदन, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखें। भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बिठाएं। उनके मस्तक पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, दायें हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें और यह पवित्र वैदिक रक्षा मंत्र बोलें:

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

राशि के अनुसार भाई के लिए शुभ राखी के रंग

  • मेष एवं वृश्चिक: लाल या नारंगी रंग की राखी।
  • वृषभ एवं तुला: रेशमी श्वेत या चमकीली चांदी के रंग की राखी।
  • मिथुन एवं कन्या: हरे रंग की राखी।
  • कर्क: सफेद या मोतियों वाली राखी।
  • सिंह: सुनहरी पीली अथवा लाल राखी।
  • धनु एवं मीन: पीली अथवा केसरिया रंग की राखी।
  • मकर एवं कुंभ: गहरे नीले रंग की राखी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राखी किस हाथ में बांधनी चाहिए?

वैदिक परंपरा के अनुसार रक्षा सूत्र सदैव भाई के दायें हाथ (सीधे हाथ) की कलाई पर बांधा जाता है।

ज्योतिषीय अस्वीकरण:

यह लेख केवल आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ज्ञानवर्धक उद्देश्यों के लिए संकलित किया गया है। ज्योतिषीय गणनाएं एवं मुहूर्त प्राचीन वैदिक सिद्धांतों और पंचांग गणना पर आधारित हैं। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय हेतु अपनी व्यक्तिगत जन्म कुंडली का विश्लेषण कराएं।

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