महर्षि पराशर द्वारा प्रतिपादित शास्त्रीय वैदिक ज्योतिष में षडबल सात प्रत्यक्ष ग्रहों की वास्तविक शक्ति मापने की प्रामाणिक गणितीय पद्धति है। संस्कृत शब्द षडबल का अर्थ 'छह प्रकार का बल' है। केवल राशि स्थिति पर निर्भर न रहकर यह प्रणाली छह स्वतंत्र खगोलीय आधारों पर ग्रह की फल देने की वास्तविक क्षमता का मूल्यांकन करती है।
कोई ग्रह आपकी जन्म कुंडली में उच्च का दिखाई दे सकता है, किंतु यदि उसमें पर्याप्त षडबल नहीं है, तो वह अनुकूल परिणाम देने में असमर्थ रहता है। इसके विपरीत, नीच राशि का ग्रह भी यदि षडबल में बलिष्ठ हो, तो अपनी कमजोरियों को पार कर अप्रत्याशित सफलता प्रदान करता है।
- विरूपा और रूपा: ग्रहीय बल की शास्त्रीय इकाई विरूपा कहलाती है। 60 विरूपा मिलकर 1 रूपा का निर्माण करते हैं।
- गणितीय सटीकता: यह प्रणाली दिशा, गति, जन्म काल और विभिन्न वर्गीय कुंडलियों में स्थिति का विश्लेषण कर एक सटीक संख्यात्मक मान निर्धारित करती है।
- महादशा पर प्रभाव: षडबल में बलिष्ठ ग्रह अपनी विंशोत्तरी महादशा में प्रचुर शुभ फल प्रदान करते हैं, जबकि निर्बल ग्रह विलंब और संघर्ष का कारण बनते हैं।