गोचर पैरामीटर सेट करें

लाइव ग्रह स्थिति

लाहिरी निरयण प्रणाली के अनुसार अयोध्या, भारत के लिए गणना।

चंद्र राशिगणना जारी...सूर्य राशिगणना जारी...वर्तमान वक्री ग्रहगणना जारी...

ग्रह स्थिति एवं गति

लाहिरी निरयण प्रणाली
आकाशीय स्थिति की गणना हो रही है...
आकाशीय निर्देशांक

ग्रह स्थिति एवं विस्तृत निर्देशांक

लाहिरी निरयण प्रणाली
विस्तृत निर्देशांक देखने के लिए बाएँ-दाएँ स्क्रॉल करें →
ग्रह राशि कुल भोगांश अंश ° कला ' विकला " गति नक्षत्र नक्षत्र स्वामी
गोचर सारणी

आगामी ग्रह गोचर

आगामी राशि परिवर्तन एवं वक्री अवधियों की समय-सीमा।

गोचर लोड हो रहे हैं...
ग्रह विवरण

विस्तृत गोचर विश्लेषण

प्रत्येक ग्रह की वर्तमान स्थिति, गति और नक्षत्र संदर्भ।

विवरण लोड हो रहा है...
व्यक्तिगत गोचर

व्यक्तिगत गोचर विश्लेषण

देखें कि वर्तमान ग्रह गोचर आपकी जन्म कुंडली के भावों, दशा अवधियों और साढ़े साती को कैसे प्रभावित करते हैं।

✦ सक्रिय भाव प्रभाव ✦ चंद्र व लग्न गोचर ✦ लाइव साढ़े साती स्थिति
जन्म विवरण

जन्म विवरण दर्ज करें

आपकी जन्म कुंडली के सापेक्ष भाव गोचर स्थिति की गणना हेतु उपयोग किया जाता है।

वैदिक ज्योतिष में ग्रह गोचर का महत्व एवं प्रभाव

वैदिक ज्योतिष में ग्रह गोचर से तात्पर्य आकाश में ग्रहों के निरंतर राशि परिवर्तन और गति से है। जन्म कुंडली जहां जीवन के प्रारब्ध और संभावनाओं का स्थाई नक्शा है, वहीं गोचर वह काल चक्र है जो इन संभावनाओं को साकार करता है।

गोचर का विश्लेषण जन्म लग्न और चंद्र राशि दोनों के आधार पर किया जाता है। चंद्र राशि से गोचर मन, भावनाओं और आंतरिक अनुभवों को प्रभावित करता है, जबकि लग्न से गोचर भौतिक घटनाओं और शारीरिक परिस्थितियों को आकार देता है। चंद्र, बुध और शुक्र जैसे तीव्र गति वाले ग्रह दैनिक जीवन में त्वरित बदलाव लाते हैं, जबकि शनि, गुरु, राहु और केतु जैसे मंद गति ग्रह जीवन के दीर्घकालिक अध्यायों का निर्माण करते हैं।

  • निरयण प्रणाली: गोचर गणना सटीक लाहिरी अयनांश पर आधारित होती है, जो आकाशीय नक्षत्रों की वास्तविक स्थिति दर्शाती है।
  • लग्न एवं चंद्र संदर्भ: चंद्र राशि मानसिक व भावनात्मक दशा दर्शाती है, जबकि लग्न भौतिक परिणामों का निर्धारण करता है।
  • दशा एवं गोचर का समन्वय: गोचर के परिणाम तभी फलित होते हैं जब वर्तमान में चल रही विंशोत्तरी महादशा भी उस घटना का समर्थन करती हो।

शनि की साढ़े साती और मंद गति ग्रहों का गोचर

शनि देव को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 29.5 वर्ष का समय लगता है और वे एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक संचरण करते हैं। शनि का सर्वाधिक चर्चित गोचर 'साढ़े साती' है, जो जन्म चंद्र राशि से 12वें, 1ले और 2रे भाव में शनि के भ्रमण के दौरान घटित होता है।

साढ़े साती किसी अकारण कष्ट का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्म-अनुशासन, धैर्य और कर्म-शोधन का काल है। शनि कमजोर बुनियादों को हटाकर दीर्घकालिक परिपक्वता स्थापित करते हैं। जब शनि चंद्र राशि से 3रे, 6ठे अथवा 11वें भाव में गोचर करते हैं, तब यह समय शत्रुओं पर विजय, प्रतिस्पर्धी सफलता और आर्थिक मजबूती प्रदान करता है।

  • प्रथम चरण (12वां भाव): खर्चों पर नियंत्रण, मानसिक एकाग्रता और अनावश्यक बंधनों से मुक्ति का समय।
  • द्वितीय चरण (प्रथम भाव): व्यक्तित्व, शारीरिक स्वास्थ्य और आत्मबल की परीक्षा, जिसमें उच्च धैर्य आवश्यक है।
  • तृतीय चरण (द्वितीय भाव): पारिवारिक दायित्व, वाणी पर नियंत्रण और संचित धन के पुनर्गठन का काल।

देवगुरु बृहस्पति का गोचर और शुभ दृष्टियां

देवगुरु बृहस्पति लगभग 12 माह में एक राशि का संचरण पूरा करते हैं। गुरु को नैसर्गिक शुभ ग्रह माना गया है, जो ज्ञान, संतान, धर्म, विवेक और समृद्धि का विस्तार करते हैं।

जब गुरु चंद्र राशि से 1ले, 5वें, 7वें, 9वें या 11वें भाव में गोचर करते हैं, तब विवाह, उच्च शिक्षा, पदोन्नति और संतान सुख के शुभ अवसर बनते हैं। गुरु की 5वीं, 7वीं और 9वीं विशेष दृष्टियां जिन भावों पर पड़ती हैं, वहां सुरक्षात्मक और संवर्धक प्रभाव उत्पन्न होता है।

  • प्रथम भाव में गोचर: शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार, मानसिक शांति और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि।
  • पंचम भाव में गोचर: बौद्धिक क्षमता का विकास, शिक्षा में सफलता और रचनात्मक योजनाओं का विस्तार।
  • सप्तम भाव में गोचर: विवाह के योग, साझेदारी में लाभ और सामाजिक संबंधों में मधुरता। विवाह समय भविष्यवाचक द्वारा अपना समय जांचें।
  • नवम भाव में गोचर: भाग्य का साथ, तीर्थ यात्रा, गुरु कृपा और आध्यात्मिक उन्नति।

राहु-केतु का वक्री गोचर और अक्षीय प्रभाव

राहु और केतु सदैव वक्री गति से चलते हैं और एक राशि में लगभग 18 महीने तक रहते हैं। दोनों ग्रह एक-दूसरे से 180 डिग्री के अंतर पर स्थित होते हैं, जिससे इनका गोचर जीवन के दो परस्पर जुड़े भावों को एक साथ सक्रिय करता है।

राहु जिस भाव में गोचर करता है, वहां भौतिक महत्वाकांक्षा, नए प्रयोग और सांसारिक जिज्ञासा बढ़ती है। इसके विपरीत, केतु जिस भाव में होता है, वहां वैराग्य, शोध और आंतरिक शांति का भाव जागृत होता है। चंद्र राशि से 3रे, 6ठे और 11वें भाव में राहु-केतु का गोचर विशेष रूप से लाभकारी और विजय प्रदाता माना गया है।

  • तृतीय राहु / नवम केतु: पराक्रम, साहसिक निर्णय और संचार माध्यमों से लाभ।
  • षष्ठ राहु / द्वादश केतु: रोग एवं ऋण से मुक्ति, प्रतिस्पर्धी विजय और आध्यात्मिक रुझान।
  • एकादश राहु / पंचम केतु: आय के नए स्रोत, सामाजिक प्रतिष्ठा और महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति।

विंशोत्तरी दशा और गोचर का समन्वय

वैदिक ज्योतिष का आधारभूत सिद्धांत है कि गोचर केवल उन्हीं फलों को दे सकता है जिनकी अनुमति वर्तमान विंशोत्तरी दशा देती है। दशा जीवन की मुख्य दिशा और संभावना तय करती है, जबकि गोचर उस घटना के घटित होने का समय निर्धारित करता है।

यदि आपकी जन्म कुंडली और चल रही महादशा करियर में उन्नति का संकेत दे रही है, तो 10वें भाव पर गुरु या शनि का अनुकूल गोचर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगा। यदि दशा प्रतिकूल है, तो शुभ गोचर केवल तात्कालिक राहत ही दे पाता है। सटीक फलकथन के लिए दशा और गोचर का संयुक्त अध्ययन अनिवार्य है।

  • दशा की प्रधानता: महादशा और अंतर्दशा यह तय करती हैं कि जातक के जीवन में क्या घटित हो सकता है।
  • गोचर की भूमिका: गोचर उस समय का निर्धारण करता है जब दशा का फल प्रत्यक्ष रूप से सामने आता है।
  • नक्षत्र गोचर: ग्रहों के नक्षत्र परिवर्तन का अध्ययन माह और सप्ताह स्तर पर सटीक समय की पहचान कराता है। अपना जन्म नक्षत्र नक्षत्र खोजक पर देखें।

प्रमुख नगरों एवं तीर्थों के लिए लाइव ग्रह गोचर

सटीक स्थानीय अक्षांश-देशांतर और लग्न समय के आधार पर अपने शहर का दैनिक ग्रह गोचर देखें।

📍 दिल्ली दिल्ली एनसीआर 📍 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र 📍 मुंबई महाराष्ट्र 📍 बेंगलुरु कर्नाटक 📍 हैदराबाद तेलंगाना 📍 चेन्नई तमिलनाडु 📍 कोलकाता पश्चिम बंगाल 📍 पुणे महाराष्ट्र 📍 अहमदाबाद गुजरात 📍 जयपुर राजस्थान 📍 लखनऊ उत्तर प्रदेश 📍 वाराणसी काशी, उत्तर प्रदेश 📍 उज्जैन महाकाल, मध्य प्रदेश 📍 अयोध्या उत्तर प्रदेश 📍 हरिद्वार उत्तराखंड 📍 ऋषिकेश उत्तराखंड 📍 मथुरा ब्रज, उत्तर प्रदेश 📍 सूरत गुजरात 📍 कानपुर उत्तर प्रदेश 📍 नागपुर महाराष्ट्र 📍 इंदौर मध्य प्रदेश 📍 भोपाल मध्य प्रदेश 📍 पटना बिहार 📍 वडोदरा गुजरात 📍 चंडीगढ़ पंजाब व हरियाणा 📍 देहरादून उत्तराखंड 📍 लंदन यूनाइटेड किंगडम 📍 न्यूयॉर्क संयुक्त राज्य अमेरिका

ग्रह गोचर से संबंधित प्रमुख प्रश्न

गोचर, साढ़े साती और ग्रहों की गति से जुड़े मुख्य प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर।

गोचर का अर्थ है आकाश में ग्रहों का निरंतर संचरण। जन्म कुंडली के ग्रह जहां स्थाई होते हैं, वहीं गोचर के ग्रह निरंतर आगे बढ़ते हुए आपकी कुंडली के विभिन्न भावों और जन्मकालीन ग्रहों के साथ संबंध बनाते हैं। यह संबंध करियर, वित्त, स्वास्थ्य और संबंधों में विशिष्ट घटनाओं को सक्रिय करते हैं।

साढ़े साती शनि देव का 7.5 वर्ष लंबा गोचर काल है, जो तब घटित होता है जब शनि आपकी जन्म चंद्र राशि से 12वें, 1ले और 2रे भाव में संचरण करते हैं। प्रत्येक भाव में शनि लगभग ढाई वर्ष रहते हैं। यह काल व्यक्ति को अनुशासन और धैर्य सिखाता है। इसका प्रभाव प्रत्येक लग्न के अनुसार भिन्न होता है।

गुरु लगभग 12 माह में एक राशि बदलते हैं। जब गुरु चंद्र राशि से 1ले, 5वें, 9वें या 11वें भाव में होते हैं, तब यह समय विद्या, आर्थिक समृद्धि और सम्मान के लिए अत्यंत शुभ होता है। 7वें भाव में गुरु का गोचर विवाह और साझेदारी के लिए अनुकूल माना जाता है।

राहु और केतु सदैव वक्री रहते हैं और एक राशि में 18 महीने व्यतीत करते हैं। ये दोनों छाया ग्रह हमेशा 180 डिग्री के अंतर पर रहते हैं। राहु भौतिक इच्छाओं और महत्वाकांक्षा को बढ़ाता है, जबकि केतु आध्यात्मिक गहराई और वैराग्य की ओर प्रेरित करता है।

दशा जीवन की मुख्य रूपरेखा निर्धारित करती है, जबकि गोचर उस घटना के घटित होने का समय निश्चित करता है। यदि दशा अनुकूल नहीं है तो शुभ गोचर का भी पूर्ण फल नहीं मिल पाता। दोनों का सामंजस्य होने पर ही कोई महत्वपूर्ण घटना घटती है।

मंगल का गोचर अल्पकाल में सर्वाधिक ऊर्जावान प्रभाव डालता है। मंगल एक राशि में सामान्यतः 45 दिन रहता है। संवेदनशील भावों या ग्रहों पर मंगल का गोचर उत्साह, साहस अथवा त्वरित प्रतिक्रियाओं को सक्रिय करता है। सूर्य का मासिक गोचर अधिकार और आत्मबल को गति देता है।