प्राचीन वैदिक ऋषियों और महर्षि पराशर के वृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार, ब्रह्मांड का प्रत्येक ग्रह एक विशिष्ट प्रकाश तरंग और विद्युत-चुंबकीय आवृत्ति का उत्सर्जन करता है। सूर्य के प्रकाश में सात दृश्य रंग और दो सूक्ष्म अदृश्य किरणें (राहु की अवरक्त किरण और केतु की पराबैंगनी किरण) विद्यमान होती हैं। इसे वैदिक ज्योतिष में सूर्य रश्मि सिद्धांत और आयुर्वेद में किरण चिकित्सा कहा जाता है।
जब आप अपने जन्म स्वामी ग्रह के अनुकूल रंगों के संपर्क में आते हैं, तो ये प्रकाश तरंगें आपकी आंखों और त्वचा के माध्यम से आपके प्राणमय कोश (ऊर्जा आभामंडल) में अवशोषित होती हैं। यह प्रक्रिया शरीर के सूक्ष्म चक्रों को संतुलित करती है, ओज (शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता) और तेज (मानसिक आभा व निर्णय क्षमता) में वृद्धि करती है। इसके विपरीत, विरोधी ग्रहों के रंग आभामंडल में विक्षोभ पैदा करते हैं, जिससे अवचेतन तनाव और थकान उत्पन्न होती है।
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