चेन्नई पंचांग: 20 अक्टूबर 2026 | AstroLeaf
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दैनिक वैदिक पंचांग एवं कैलेंडर

चेन्नई, भारत के लिए मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 का दैनिक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल, अभिजीत मुहूर्त, चौघड़िया एवं नवग्रह गोचर पंचांग।

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स्थान एवं तिथि चयन

मंगल, 20 अक्टूबर 2026
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चंद्र कला एवं पक्ष

शुक्ल पक्ष नवमी

चंद्रमा मकर में | सूर्य तुला में
गणना आधार चेन्नई Lat: 13.08°N | Lon: 80.27°E
सूर्योदय
05:59 AM
सूर्यास्त
05:47 PM
चन्द्रोदय
12:59 PM
चन्द्रास्त
01:23 AM
चेन्नई के लिए दैनिक पंचांग
उदया तिथि नवमी तक तक 12:51 PM नक्षत्र श्रवण तक 06:03 PM
↳ अगली तिथि दशमी तक तक 02:13 PM ↳ अगला नक्षत्र धनिष्ठा
योग शूल तक 12:50 AM प्रथम करण कौलव तक 12:51 PM
↳ अगला योग गण्ड ↳ द्वितीय करण तैतिल
वार (दिन) मंगलवार तृतीय करण गर
चेन्नई के लिए शुभ मुहूर्त एवं संध्या काल
अभिजीत मुहूर्त 11:30 AM - 12:17 PM ब्रह्म मुहूर्त 04:25 AM - 05:17 AM
प्रातः संध्या 04:55 AM - 05:59 AM सायाह्न संध्या 05:47 PM - 06:51 PM
अमृत काल 11:18 AM - 12:29 PM गोधूलि मुहूर्त 05:23 PM - 06:11 PM
चेन्नई में अशुभ समय (अशुभ मुहूर्त)
राहु काल 02:50 PM - 04:19 PM यमगण्ड 08:56 AM - 10:25 AM
गुलिक काल 11:53 AM - 01:22 PM दुर्मुहूर्त 12:17 PM - 01:04 PM
वर्ज्यम् 08:35 AM - 09:18 AM गण्डमूल नक्षत्र नहीं (सामान्य नक्षत्र)
ग्रह स्थिति एवं नवग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि राशि स्वामी नक्षत्र पद नक्षत्र स्वामी गति
सूर्यतुलाशुक्रचित्रापद 3मंगल मार्गी
चन्द्रमकरशनिश्रवणपद 3चन्द्र मार्गी
मंगलकर्कचन्द्रअश्लेषापद 1बुध मार्गी
बुधतुलाशुक्रविशाखापद 2गुरु मार्गी
गुरुकर्कचन्द्रअश्लेषापद 4बुध मार्गी
शुक्रतुलाशुक्रस्वातीपद 1राहु वक्री
शनिमीनगुरुउत्तराभाद्रपदपद 4शनि वक्री
राहुकुंभशनिधनिष्ठापद 3मंगल वक्री
केतुसिंहसूर्यमघापद 1केतु वक्री
वैदिक तत्व, निवास एवं दिशा शूल
दिशा शूल उत्तर दिशा शूल उपाय यात्रा से पूर्व गुड़ या धनिया खाकर निकलें।
आनंदादि योग राक्षस तमिल / सिद्ध योग मरण योग (अशुभ)
अग्निवास एवं शिववास पृथ्वी (हवन हेतु शुभ) लाहिड़ी अयनांश 24.232476°
कलि अहर्गण 2613001 जूलियन दिन 2461333.52
हिंदू संवत एवं मंत्री मंडल
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948
कलि संवत
5127
संवत्सर का नाम
क्रोधी

वर्ष का मंत्री मंडल

राजा बृहस्पति (गुरु 👑 राजा)
सेनाधिपति चन्द्र (सेनाधिपति ⚔️)
मंत्री मंगल (मन्त्री ⚜️)
मेघाधिपति (वर्षा) चन्द्र (मेघाधिपति 🌧️ वर्षा)

चेन्नई में वैदिक काल गणना के सिद्धांत

वैदिक समय की गणना मानक घड़ी के समय के बजाय चेन्नई, भारत में स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित होती है। चूंकि सूर्योदय अक्षांश (13.08° उत्तर) और देशांतर (80.27° पूर्व) पर निर्भर करता है, इसलिए प्रत्येक शहर के अपने विशिष्ट गणना निर्देशांक होते हैं। पारंपरिक वैदिक कैलेंडर, जिसे पंचांग कहा जाता है, पांच खगोलीय अंगों की गणना करता है: तिथि (चंद्र दिवस), नक्षत्र (चंद्र नक्षत्र), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), करण (तिथि का आधा भाग), और वार (सप्ताह का दिन)।

पंचांग का समय देखने से चेन्नई में दैनिक कार्य, यात्रा, धार्मिक अनुष्ठान और व्रत के लिए दिन के विभिन्न समयों की शुभता निर्धारित करने में मदद मिलती है। आप हमारे सूर्योदय सूर्यास्त कैलकुलेटर से सौर समय देख सकते हैं और हमारे तिथि कैलकुलेटर से सक्रिय चंद्र कलाओं की जांच कर सकते हैं।

तिथि गणना एवं चंद्र दिवस

तिथि एक चंद्र दिवस है, जो सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर से परिभाषित होती है। जब चंद्रमा सूर्य के सापेक्ष 12 अंश (डिग्री) आगे बढ़ता है, तो एक नई तिथि प्रारंभ होती है। चूंकि चंद्रमा की गति पृथ्वी के निकट (उपभू) तेज और दूर (अपभू) धीमी होती है, इसलिए एक तिथि की अवधि 19 से 26 घंटे तक हो सकती है।

एक चंद्र माह में दो पक्षों के अंतर्गत 30 तिथियां होती हैं। शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा तक 15 शुक्ल तिथियां होती हैं, जबकि कृष्ण पक्ष में अमावस्या पर समाप्त होने वाली 15 कृष्ण तिथियां होती हैं। कुछ तिथियां शुभ और रचनात्मक कार्यों के लिए चुनी जाती हैं, जबकि अन्य तिथियां आत्म-चिंतन, ऋण मुक्ति या आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ मानी जाती हैं।

आज का नक्षत्र एवं 27 चंद्र नक्षत्र मंडल

नक्षत्र वह तारामंडल है जिसमें चंद्रमा पृथ्वी की 27-दिवसीय परिक्रमा के दौरान स्थित होता है। 360 अंश के संपूर्ण भचक्र को 13 अंश 20 कला के 27 समान नक्षत्र क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। सूर्योदय के समय उपस्थित नक्षत्र उस दिन की मूल ऊर्जा का निर्धारण करता है।

प्राचीन ग्रंथों में प्रत्येक नक्षत्र का एक स्वामी ग्रह और अधिष्ठाता देवता निर्धारित है। पुष्य, रोहिणी या उत्तराफाल्गुनी जैसे शुभ नक्षत्र व्यापारिक शुरुआत और दीर्घकालिक कार्यों के लिए चुने जाते हैं, जबकि मूल या आर्द्रा जैसे तीक्ष्ण नक्षत्र प्रतिस्पर्धा और अनुसंधान के लिए अनुकूल होते हैं। अपना जन्म नक्षत्र जानने के लिए हमारे नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें।

आज का योग

दैनिक योग सूर्य और चंद्रमा के देशांतरीय संचलन का संयुक्त माप है। इसकी गणना सूर्य के देशांतर को चंद्रमा के देशांतर में जोड़कर और 13 अंश 20 कला से विभाजित करके की जाती है, जिससे 27 योगों में से एक योग प्राप्त होता है।

वैदिक ज्योतिष में योग दिन के सूक्ष्म वातावरण की अनुकूलता दर्शाते हैं। सिद्धि, शिव और साध्य जैसे शुभ योग सामूहिक कार्यों, अध्ययन और समझौतों के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं, जबकि व्यतीपात और वैधृति जैसे योगों में संयम और धैर्य रखने की सलाह दी जाती है।

करण एवं दैनिक कार्य क्षमता

करण तिथि का आधा भाग होता है, जो सूर्य और चंद्रमा के बीच 6 अंश के अंतर के बराबर होता है। प्रत्येक चंद्र मास में 60 करण होते हैं, जिनमें 11 प्रकार के करण क्रमानुसार आते हैं।

  • चर करण: सात चर करण पूरे महीने चक्र में चलते हैं: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज और विष्टि। ये गतिशील और व्यावहारिक गतिविधियों से संबंधित हैं।
  • स्थिर करण: चार स्थिर करण अमावस्या के निकट महीने में केवल एक बार आते हैं: शकुनि, चतुष्पद, नाग और किस्तुघ्न। ये पारंपरिक रूप से भूमि-संबंधी कार्यों, अध्ययन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  • भद्रा (विष्टि): विष्टि करण को ही भद्रा कहा जाता है। इसमें विशेष सावधानी आवश्यक होती है। भद्रा के सक्रिय रहते यात्रा प्रारंभ करने या अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से बचा जाता है।

राहु काल एवं अभिजीत मुहूर्त समय

चेन्नई में दैनिक दिनचर्या की योजना में दिनभर के अनुकूल और प्रतिकूल समय का संतुलन शामिल होता है।

राहु काल प्रत्येक दिन लगभग 90 मिनट की अवधि होती है जो राहु से संबंधित होती है। इसकी गणना दिनमान (सूर्योदय से सूर्यास्त) को आठ बराबर भागों में विभाजित करके की जाती है। वैदिक परंपरा में इस अवधि में महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन, नई खरीदारी और यात्राएं वर्जित मानी जाती हैं।

अभिजीत मुहूर्त दोपहर के समय लगभग 48 मिनट की अत्यंत शुभ अवधि है, जो चेन्नई में स्थानीय मध्याह्न पर केंद्रित होती है। जब अन्य कोई विशिष्ट मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो नए कार्य, व्यापारिक अनुबंध या यात्रा प्रारंभ करने के लिए अभिजीत मुहूर्त सर्वोत्तम माना जाता है।

चेन्नई पंचांग से संबंधित प्रश्न

चेन्नई, भारत में दैनिक काल गणना एवं शुभ समय से संबंधित मुख्य जानकारियां।

पंचांग एक पारंपरिक पांच अंगों (तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार) पर आधारित वैदिक कैलेंडर है। यह स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर दैनिक कार्यों, व्रतों और शुभ मुहूर्तों के निर्धारण में मदद करता है।

वैदिक समय गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित होती है। क्योंकि विभिन्न शहरों के अक्षांश (13.08° उत्तर) और देशांतर (80.27° पूर्व) अलग-अलग होते हैं, इसलिए प्रत्येक कालखंड का सटीक समय तदनुसार बदलता है।

अभिजीत मुहूर्त स्थानीय दोपहर (मध्याह्न) के आसपास 48 मिनट की एक अत्यंत शुभ अवधि है। जब कोई विशेष मुहूर्त उपलब्ध न हो, तब नए कार्यों, व्यापारिक समझौतों और शुभ शुरुआत के लिए इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

राहु काल सूर्योदय से सूर्यास्त तक के संपूर्ण दिनमान को आठ बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है। वार (सप्ताह के दिन) के आधार पर इनमें से एक भाग राहु काल कहलाता है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

तिथि एक चंद्र दिवस है जो सूर्य और चंद्रमा के बीच के देशांतरीय कोण से निर्धारित होती है। जब भी चंद्रमा सूर्य से 12 अंश (डिग्री) आगे बढ़ता है, एक नई तिथि प्रारंभ होती है।

करण तिथि का आधा भाग होता है, जो सूर्य और चंद्रमा के बीच 6 अंश के अंतर को दर्शाता है। कुल 11 करण (7 चर और 4 स्थिर) होते हैं जिनका उपयोग दैनिक कार्यों के शुभ-अशुभ निर्णय में किया जाता है।

स्थान अनुसार पंचांग

प्रमुख भारतीय शहरों के लिए आज का पंचांग

सटीक सूर्योदय, सूर्यास्त और अक्षांश-देशांतर के आधार पर अपने शहर का आज का पंचांग देखें।

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