शास्त्रीय वैदिक अंकज्योतिष और सांख्य शास्त्र के अनुसार एक से नौ तक का प्रत्येक एकल अंक नवग्रहों में से किसी एक ग्रह स्वामी से संबद्ध होता है। आपके जन्म विवरण से आपका मूलांक (जन्म दिन का एकल योग) और भाग्यांक (पूर्ण जन्म तिथि का कुल योग) निर्धारित होता है।
ग्रहों के बीच स्वाभाविक मित्रता, समता और शत्रुता के संबंध होते हैं। जब किसी कैलेंडर दिन का ग्रह स्वामी आपके जन्म ग्रह स्वामियों का विरोधी या शत्रु ग्रह होता है, तो उस दिन के कार्यों में स्वाभाविक ग्रहीय घर्षण उत्पन्न होता है। हमारे अशुभ तारीख कैलकुलेटर पर हम इन दिनों को सावधानी तारीखें और एंटी-डेट्स के रूप में चिन्हित करते हैं।
- सूर्य (1) बनाम राहु (4) व शनि (8): उच्चाधिकारियों के साथ मतभेद, अप्रत्याशित प्रशासनिक देरी और सरकारी कार्यों में रुकावट।
- चन्द्र (2) बनाम राहु (4), शनि (8) व मंगल (9): मानसिक अशांति, अधीरता, मूड स्विंग और पारिवारिक व व्यक्तिगत संबंधों में तनाव।
- गुरु (3) बनाम राहु (4) व शुक्र (6): वैचारिक मतभेद, प्रतिस्पर्धी सलाह और वित्तीय या कानूनी मामलों में अत्यधिक विस्तार।
- राहु (4) बनाम सूर्य (1), चन्द्र (2), शनि (8) व मंगल (9): अचानक व्यवधान, अहं का टकराव और अप्रत्याशित तकनीकी रुकावटें।
- बुध (5) बनाम मंगल (9): जल्दबाजी में लिए गए निर्णय, आवेगी व्यापारिक सौदे और तीखी वाणिज्यिक बहस।
- शुक्र (6) बनाम गुरु (3) व शनि (8): विलासिता और कर्तव्य में असमंजस, वैवाहिक बातचीत में देरी और बजट में खिंचाव।
- केतु (7) बनाम शनि (8) व मंगल (9): ध्यान का भटकाव, अचानक बेचैनी और तकनीकी गणनाओं में त्रुटि।
- शनि (8) बनाम सूर्य (1), चन्द्र (2) व राहु (4): भारी प्रशासनिक प्रतिरोध, परिणामों में विलंब और संरचनात्मक अड़चनें।
- मंगल (9) बनाम राहु (4) व शनि (8): अत्यधिक आक्रामकता, कानूनी विवाद, यांत्रिक खराबी और अचानक घर्षण।