गणेश चतुर्थी 2026 | स्थापना मुहूर्त | AstroLeaf

गणेश चतुर्थी 2026: स्थापना मुहूर्त, पूजा विधि एवं चतुर्थी तिथि समय

प्रकाशित: 12 सितंबर 2026 (शनिवार) | अंतिम अपडेट: 17 सितंबर 2026 (गुरुवार) · 6 मिनट पठन
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गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता एवं बुद्धि प्रदाता भगवान श्री गणेश के पावन प्राकट्य का महापर्व है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से आरंभ होने वाला यह पावन उत्सव दस दिवसीय गणेशोत्सव के रूप में श्रद्धा एवं उल्लास से मनाया जाता है। वर्ष 2026 में मध्याह्न पूजा मुहूर्त, श्री गणेश स्थापना की संपूर्ण विधि और चंद्र दर्शन निषेध से जुड़े आवश्यक वैदिक नियमों का पालन कर बप्पा को अपने घर में आमंत्रित करें।

गणेश चतुर्थी 2026: खगोलीय गणना एवं चतुर्थी तिथि का निर्धारण

वैदिक पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी का निर्णय मध्याह्न काल के आधार पर किया जाता है। शास्त्रीय काल-गणना में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को पांच समान भागों में बांटा गया है: प्रातःकाल, संगव, मध्याह्न, अपराह्न और सायाह्न। भगवान गणेश का प्राकट्य मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए मध्याह्न व्यापिनी चतुर्थी तिथि को ही गणपति स्थापना और पूजन के लिए सर्वोपरि माना गया है।

वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का प्रारंभ सोमवार, 14 सितंबर को सुबह 07:06 बजे हो रहा है और इसका समापन मंगलवार, 15 सितंबर को सुबह 07:44 बजे होगा। चूंकि सोमवार को मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि पूर्ण रूप से व्याप्त है, इसलिए सोमवार, 14 सितंबर 2026 को ही पूरे देश में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाएगा।

गणपति स्थापना एवं मध्याह्न पूजा के प्रमाणित शुभ मुहूर्त

कुंडली परामर्श और शास्त्र सम्मत विधान के अनुसार गणपति बप्पा की स्थापना मध्याह्न व्यापिनी शुभ चौघड़िया अथवा स्थिर लग्न में की जानी चाहिए। नई दिल्ली एवं भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार 2026 के प्रमाणित शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

# पर्व एवं अनुष्ठान क्रम तिथि एवं वार शुभ समय एवं अवधि
1 चतुर्थी तिथि प्रारंभ 14 सितंबर 2026 (सोमवार) प्रातः 07:06 बजे
2 चतुर्थी तिथि समापन 15 सितंबर 2026 (मंगलवार) प्रातः 07:44 बजे
3 गणेश पूजा मध्याह्न मुहूर्त 14 सितंबर 2026 (सोमवार) पूर्वाह्न 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 28 मिनट)
4 चंद्र दर्शन निषेध समय (मिथ्या कलंक) 14 सितंबर 2026 (सोमवार) प्रातः 09:06 बजे से रात्रि 08:04 बजे तक
5 गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) दिनभर शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध

भारत के प्रमुख शहरों में मध्याह्न स्थापना समय

स्थानीय सूर्योदय और देशांतर भेद के कारण प्रत्येक नगर में मध्याह्न काल के समय में कुछ मिनटों का अंतर होता है। अपने शहर के अनुसार शुद्ध समय सारणी देखें:

# नगर / क्षेत्र मध्याह्न पूजन मुहूर्त कुल अवधि
1 मुंबई पूर्वाह्न 11:20 बजे से दोपहर 01:48 बजे तक 2 घंटे 28 मिनट
2 पुणे पूर्वाह्न 11:16 बजे से दोपहर 01:44 बजे तक 2 घंटे 28 मिनट
3 नई दिल्ली एवं एनसीआर पूर्वाह्न 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक 2 घंटे 28 मिनट
4 बेंगलुरु पूर्वाह्न 11:02 बजे से दोपहर 01:28 बजे तक 2 घंटे 26 मिनट
5 कोलकाता प्रातः 10:18 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक 2 घंटे 28 मिनट
6 अहमदाबाद पूर्वाह्न 11:21 बजे से दोपहर 01:50 बजे तक 2 घंटे 29 मिनट
7 वाराणसी पूर्वाह्न 10:43 बजे से दोपहर 01:11 बजे तक 2 घंटे 28 मिनट

गणपति स्थापना एवं षोडशोपचार पूजन की प्रामाणिक विधि

घर में गणपति बप्पा की स्थापना करते समय शुद्ध मिट्टी अथवा प्राकृतिक पदार्थों से निर्मित प्रतिमा का चयन करें। पूजन स्थल को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में शुद्ध कर लाल अथवा पीले वस्त्र से सुसज्जित चौकी स्थापित करें:

  • दीप प्रज्वलन एवं संकल्प: चौकी पर अक्षत की अष्टदल कमल की आकृति बनाकर तांबे अथवा पीतल का कलश स्थापित करें। घी का दीपक जलाकर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत एवं पूजन का संकल्प लें।
  • प्राण प्रतिष्ठा: गणपति प्रतिमा के हृदय स्थल को स्पर्श करते हुए वैदिक मंत्रों अथवा ॐ गं गणपतये नमः का जप करते हुए बप्पा का सजीव आह्वान करें।
  • षोडशोपचार अर्पण: भगवान को पाद्य, अर्घ्य, आचमन, पंचामृत स्नान और शुद्ध जल स्नान कराएं। तत्पश्चात जनेऊ, लाल चंदन, रोली, अक्षत, इत्र और लाल वस्त्र अर्पित करें।
  • दुर्वा एवं मोदक अर्पण: गणेश जी को दुर्वा घास अत्यंत प्रिय है। 21 दुर्वा के जोड़े बनाकर अर्पित करें। इसके साथ ही 21 मोदक अथवा बेसन के लड्डुओं का भोग लगाएं।
  • आरती एवं क्षमा प्रार्थना: कपूर और पंचमुखी दीपक से गणपति जी की आरती करें और अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करें।

चंद्र दर्शन निषेध एवं मिथ्या कलंक निवारण

पौराणिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना सर्वथा वर्जित माना गया है। इस दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर झूठे आरोप या लांछन (मिथ्या कलंक) लगने का दोष उत्पन्न होता है। भगवान श्रीकृष्ण पर भी इसी दिन चंद्र दर्शन के कारण स्यमंतक मणि चोरी का मिथ्या आरोप लगा था।

यदि भूलवश इस दिन चंद्रमा के दर्शन हो जाएं, तो इस दोष के निवारण हेतु श्रीमद्भागवत महापुराण के स्यमंतक मणि उद्धार आख्यान का श्रवण करें अथवा इस श्लोक का 21 बार जप करें:

सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

ज्योतिषीय महत्व एवं ग्रह दोष निवारण

वैदिक ज्योतिष में भगवान गणेश को केतु ग्रह का अधिष्ठाता देव माना गया है। इसके अतिरिक्त बुध ग्रह की अनुकूलता और विद्या-बुद्धि की प्राप्ति हेतु भी गणेश जी की आराधना अमोघ फलदायी होती है। जिन जातकों की कुंडली में केतु की महादशा अथवा अंतर्दशा चल रही हो, या जो जातक अज्ञात भय, वाणी दोष अथवा व्यापार में रुकावट का सामना कर रहे हों, उन्हें इस पर्व पर विशेष रूप से दुर्वा और मोदक अर्पित कर गणेश अथर्वशीर्ष का 11 बार पाठ करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

गणेश चतुर्थी 2026 में किस दिन मनाई जाएगी?

वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि पूर्ण रूप से व्याप्त रहेगी।

गणपति स्थापना के लिए सबसे शुभ समय क्या है?

गणपति स्थापना एवं पूजन का श्रेष्ठ समय मध्याह्न काल में पूर्वाह्न 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक (नई दिल्ली समयानुसार) रहेगा।

अनंत चतुर्दशी यानी गणेश विसर्जन कब होगा?

दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा के विसर्जन के साथ होगा।

ज्योतिषीय अस्वीकरण:

यह लेख केवल आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ज्ञानवर्धक उद्देश्यों के लिए संकलित किया गया है। ज्योतिषीय गणनाएं एवं मुहूर्त प्राचीन वैदिक सिद्धांतों और पंचांग गणना पर आधारित हैं। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय हेतु अपनी व्यक्तिगत जन्म कुंडली का विश्लेषण कराएं।

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