करवा चौथ व्रत | शुभ चंद्रोदय समय & पूजा विधि | AstroLeaf

करवा चौथ व्रत: शुभ चंद्रोदय समय, पूजा विधि, सामग्री सूची एवं ज्योतिषीय महत्व

प्रकाशित: 14 अगस्त 2026 (शुक्रवार) | अंतिम अपडेट: 14 सितंबर 2026 (सोमवार) · 5 मिनट पठन
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करवा चौथ सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाने वाला निर्जला व्रत है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व प्रेम, त्याग और दांपत्य निष्ठा का प्रतीक है। संपूर्ण पूजन सामग्री, करवा फेरने की विधि, चंद्रोदय समय और पारण के वैदिक नियमों का विस्तृत विवरण देखें।

करवा चौथ की सनातन परंपरा एवं आध्यात्मिक रहस्य

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने और दांपत्य जीवन की रक्षा के लिए यह व्रत रखा था। महाभारत काल में द्रौपदी ने भी पांडवों के संकट निवारण हेतु महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर करवा चौथ का व्रत किया था। करवा शब्द मिट्टी के उस पात्र का प्रतीक है जो पंचतत्वों और प्रकृति की उर्वरता का प्रतिनिधित्व करता है।

करवा चौथ का ज्योतिषीय एवं खगोलीय महत्व

चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की प्रिय तिथि है और इसका स्वामित्व चंद्रमा के पास होता है। करवा चौथ की रात्रि में चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में स्थित होकर अपनी उच्च अवस्था में रहता है, जिससे निकलने वाली किरणें अमृतमयी और मन को स्थिरता प्रदान करने वाली होती हैं। चंद्रमा को मन का कारक (चंद्रमा मनसो जातः) माना गया है, इसलिए चंद्र दर्शन से दांपत्य जीवन में शीतलता और प्रेम का संचार होता है।

करवा चौथ की संपूर्ण पूजा विधि एवं अनुष्ठान क्रम

  • सरगी सेवन: सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में सास द्वारा दी गई सरगी (फल, मेवे, मिठाई) का सेवन कर व्रत का संकल्प लें। इसके उपरांत सूर्यास्त तक निर्जला रहें।
  • शाम की कथा एवं करवा फेरना: शाम को शुभ मुहूर्त में माता पार्वती, शिव जी, कार्तिकेय और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर चौकी पर स्थापित करें। करवा चौथ की पावन व्रत कथा सुनें और आपस में करवा फेरने की रस्म पूर्ण करें।
  • चंद्र दर्शन एवं अर्घ्य: रात्रि में चंद्रोदय होने पर छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा का दर्शन करें, फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें। इसके बाद चंद्रमा को दूध व जल मिलाकर अर्घ्य अर्पित करें।
  • व्रत पारण: पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें और घर के बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा और पति को देखने का क्या कारण है?

छलनी से देखने का भाव यह है कि सभी नकारात्मक विचार और दोष छनकर दूर हो जाएं और केवल पवित्र प्रेम एवं शुभ दृष्टि ही दांपत्य जीवन में बनी रहे।

यदि मौसम खराब होने के कारण चंद्रमा न दिखाई दे तो क्या करें?

यदि आकाश में बादल होने के कारण चंद्रमा न दिखे, तो पंचांग के अनुसार स्थानीय चंद्रोदय के समय भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्र देव का ध्यान कर अर्घ्य अर्पित कर व्रत खोला जा सकता है।

ज्योतिषीय अस्वीकरण:

यह लेख केवल आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ज्ञानवर्धक उद्देश्यों के लिए संकलित किया गया है। ज्योतिषीय गणनाएं एवं मुहूर्त प्राचीन वैदिक सिद्धांतों और पंचांग गणना पर आधारित हैं। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय हेतु अपनी व्यक्तिगत जन्म कुंडली का विश्लेषण कराएं।

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