वैदिक ज्योतिष और पारंपरिक भारतीय काल गणना में राहुकाल (राहु कालम) प्रत्येक दिन का लगभग 90 मिनट का एक विशिष्ट समय खंड है। यह अवधि छाया ग्रह राहु द्वारा शासित होती है। खगोल विज्ञान में राहु कोई ठोस भौतिक पिंड नहीं है, बल्कि चंद्रमा के परिक्रमा पथ और सूर्य के आभासी पथ का उत्तरी कटाव बिंदु (उत्तरी पात बिंदु) है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय स्वरभानु नामक असुर ने अमृत का पान कर लिया था। सूर्य और चंद्रमा के संकेत पर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका शीश धड़ से अलग कर दिया। शीश वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु कहलाया।
सूर्य और चंद्रमा के साथ स्वाभाविक विरोध होने के कारण राहु की दैनिक खिड़की में नए उद्यम शुरू करने पर अचानक बाधाएं, भटकाव या निर्णय में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए इस समय नए वित्तीय सौदे या मांगलिक कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।