आज का राहुकाल Mathura में (14 अक्टूबर): सटीक समय एवं अशुभ मुहूर्त | AstroLeaf
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आज का राहुकाल कैलकुलेटर

Mathura, Uttar Pradesh, India के लिए स्थानीय सूर्योदय एवं सूर्यास्त के आधार पर सटीक राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल की गणना करें।

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राहुकाल एवं मुहूर्त समय

बुधवार, 14 अक्टूबर
वार: बुधवार
समय क्षेत्र: UTC+5.5 स्थान: Mathura, Uttar Pradesh, India (27.4924, 77.6737)
राहुकाल (अशुभ समय) राहु द्वारा शासित

12:05 PM से 01:32 PM

अशुभ प्रहर 5 नया कार्य आरंभ न करें
यमगंड काल यम द्वारा शासित

07:45 AM से 09:11 AM

अशुभ प्रहर 2 लंबी यात्रा से बचें
गुलिक काल गुलिक द्वारा शासित

10:38 AM से 12:05 PM

पुनरावृत्ति प्रहर 4 कार्य दोहराव की संभावना
अभिजित मुहूर्त शुभ मध्याह्न काल

11:42 AM से 12:28 PM

मध्याह्न सौर खिड़की विजयी निवारक काल
दिनमान (कुल दिन की अवधि) सौर चक्र

11 घंटे 33 मिनट

सूर्योदय 06:18 AM सूर्यास्त 05:52 PM
1/8वां दिन विभाजन (अष्टमंश) 8 प्रहर

~87 मिनट / प्रहर

वार: बुधवार 14 अक्टूबर 2026
साप्ताहिक पंचांग

7 दिवसीय साप्ताहिक राहुकाल सारणी

Mathura, Uttar Pradesh, India के लिए आगामी 7 दिनों के सटीक राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल समय।

वार एवं दिनांक सूर्योदय से सूर्यास्त राहुकाल (नया कार्य टालें) यमगंड काल गुलिक काल
बुधवार
14 अक्टूबर
06:18 AM से 05:52 PM 12:05 PM से 01:32 PM 07:45 AM से 09:11 AM 10:38 AM से 12:05 PM
गुरुवार
15 अक्टूबर
06:19 AM से 05:51 PM 01:31 PM से 02:58 PM 06:19 AM से 07:45 AM 09:12 AM से 10:38 AM
शुक्रवार
16 अक्टूबर
06:19 AM से 05:50 PM 10:38 AM से 12:04 PM 02:57 PM से 04:23 PM 07:46 AM से 09:12 AM
शनिवार
17 अक्टूबर
06:20 AM से 05:49 PM 09:12 AM से 10:38 AM 01:30 PM से 02:56 PM 06:20 AM से 07:46 AM
रविवार
18 अक्टूबर
06:20 AM से 05:48 PM 04:22 PM से 05:48 PM 12:04 PM से 01:30 PM 02:56 PM से 04:22 PM
सोमवार
19 अक्टूबर
06:21 AM से 05:47 PM 07:47 AM से 09:12 AM 10:38 AM से 12:04 PM 01:30 PM से 02:55 PM
मंगलवार
20 अक्टूबर
06:22 AM से 05:46 PM 02:55 PM से 04:20 PM 09:13 AM से 10:38 AM 12:04 PM से 01:29 PM

राहुकाल में टालने योग्य कार्य

  • नए व्यावसायिक सौदे: नया व्यवसाय शुरू करना, दुकान का उद्घाटन या नई वेबसाइट लॉन्च करना टालें।
  • महत्वपूर्ण अनुबंध: संपत्ति की रजिस्ट्री, शेयर बाजार में बड़ा निवेश या साझेदारी पत्र पर हस्ताक्षर न करें।
  • बड़ी खरीदारी: नया वाहन, सोने के आभूषण, भूमि या मकान की खरीदारी को इस समय से बचाएं।
  • मांगलिक संस्कार: गृह प्रवेश, सगाई या विवाह जैसे शुभ संस्कारों को इस अवधि में न रखें।

राहुकाल में अनुमत एवं अनुशंसित कार्य

  • नियमित कार्य: दैनिक कार्यालयी कार्य, पढ़ाई और पहले से चल रहे प्रोजेक्ट सामान्य रूप से जारी रख सकते हैं।
  • राहु शांति मंत्र: "ॐ रां राहवे नमः" अथवा राहु स्तोत्र का जाप करने से मानसिक स्थिरता मिलती है।
  • इष्ट देव की प्रार्थना: भगवान गणेश, शिवजी अथवा मां दुर्गा की उपासना से भय और भ्रम दूर होता है।
  • दान एवं परोपकार: काले तिल, उड़द दाल या जरूरतमंदों को वस्त्र दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।

राहुकाल क्या है? खगोलीय एवं पौराणिक आधार

वैदिक ज्योतिष और पारंपरिक भारतीय काल गणना में राहुकाल (राहु कालम) प्रत्येक दिन का लगभग 90 मिनट का एक विशिष्ट समय खंड है। यह अवधि छाया ग्रह राहु द्वारा शासित होती है। खगोल विज्ञान में राहु कोई ठोस भौतिक पिंड नहीं है, बल्कि चंद्रमा के परिक्रमा पथ और सूर्य के आभासी पथ का उत्तरी कटाव बिंदु (उत्तरी पात बिंदु) है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय स्वरभानु नामक असुर ने अमृत का पान कर लिया था। सूर्य और चंद्रमा के संकेत पर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका शीश धड़ से अलग कर दिया। शीश वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु कहलाया।

सूर्य और चंद्रमा के साथ स्वाभाविक विरोध होने के कारण राहु की दैनिक खिड़की में नए उद्यम शुरू करने पर अचानक बाधाएं, भटकाव या निर्णय में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए इस समय नए वित्तीय सौदे या मांगलिक कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

राहुकाल की गणना कैसे होती है: दिनमान का 8-अष्टमंश विभाजन

राहुकाल का समय कभी भी घड़ी के निश्चित घंटों पर स्थिर नहीं रहता। यह प्रत्येक नगर के भौगोलिक अक्षांश, देशांतर और उस दिन के स्थानीय सूर्योदय व सूर्यास्त के अनुसार प्रतिदिन बदलता है।

पारंपरिक गणना में स्थानीय सूर्योदय से सूर्यास्त के कुल दिनमान को आठ बराबर भागों (प्रहर या अष्टमंश) में विभाजित किया जाता है। 12 घंटे के एक मानक दिन में प्रत्येक प्रहर ठीक 90 मिनट का होता है:

दिन के समय अष्टक अवधि = (स्थानीय सूर्यास्त का समय - स्थानीय सूर्योदय का समय) / 8

दिन का पहला प्रहर हमेशा उस वार के स्वामी ग्रह द्वारा शासित होता है। राहु किसी भी दिन पहले प्रहर का स्वामी नहीं होता। सप्ताह के प्रत्येक दिन राहु का एक निश्चित प्रहर निर्धारित है:

  • सोमवार: द्वितीय प्रहर (6:00 बजे सूर्योदय पर प्रातः 07:30 से 09:00 बजे तक)
  • शनिवार: तृतीय प्रहर (प्रातः 09:00 से 10:30 बजे तक)
  • शुक्रवार: चतुर्थ प्रहर (प्रातः 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक)
  • बुधवार: पंचम प्रहर (दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक)
  • गुरुवार: षष्ठ प्रहर (दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक)
  • मंगलवार: सप्तम प्रहर (अपराह्न 03:00 से 04:30 बजे तक)
  • रविवार: अष्टम प्रहर (सायं 04:30 से 06:00 बजे तक सूर्यास्त पूर्व)

राहुकाल, यमगंड काल एवं गुलिक काल में अंतर

वैदिक पंचांग दिन के तीन प्रमुख छाया कालखंडों का विश्लेषण करता है। इन तीनों का प्रभाव और त्यागने योग्य कार्य अलग-अलग हैं:

छाया कालखंड शासक सत्ता मूल प्रकृति व्यावहारिक निर्देश
राहुकाल राहु (उत्तरी नोड) भ्रम, अप्रत्याशित विलंब एवं असफलता नया व्यावसायिक उपक्रम या मांगलिक कार्य न करें
यमगंड काल यमराज (धर्म एवं मृत्यु के देवता) कार्य में रुकावट, नुकसान अथवा विफलता लंबी यात्रा अथवा संवेदनशील वार्ता आरंभ न करें
गुलिक काल गुलिक (शनि देव के पुत्र) कार्यों की पुनरावृत्ति (बार-बार होना) ऋण लेना या चिकित्सा शुरू करना टालें

अभिजित मुहूर्त: मध्याह्न का सर्वोत्तम निवारक समय

वैदिक ज्योतिष में अभिजित मुहूर्त को दिन का 8वां मुहूर्त माना जाता है, जो स्थानीय सौर दोपहर (मध्याह्न) के ठीक 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद तक रहता है। यह समय भगवान विष्णु के आशीर्वाद से अभिमंत्रित माना जाता है और कई प्रकार के काल दोषों को शांत करने की क्षमता रखता है।

यदि किसी अपरिहार्य कारणवश कोई आवश्यक कार्य तुरंत करना पड़े और दूसरे दिन तक प्रतीक्षा करना संभव न हो, तो अभिजित मुहूर्त में कार्य संपन्न करने से बाधाएं न्यूनतम हो जाती हैं।

संबंधित पंचांग उपकरण

दैनिक मुहूर्त एवं पंचांग साधन

FAQ

राहुकाल से संबंधित सामान्य प्रश्न

दैनिक पंचांग एवं अशुभ छाया कालखंडों के नियम।

राहुकाल दिन का लगभग 90 मिनट का एक समय खंड है जो छाया ग्रह राहु द्वारा शासित होता है। वैदिक ज्योतिष में राहु भ्रम, बाधा और अचानक आने वाली परेशानियों का कारक है। इसलिए इस काल में नए व्यावसायिक सौदे, निवेश अथवा मांगलिक अनुष्ठान टालने की सलाह दी जाती है।

राहुकाल स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर आधारित होता है। चूंकि प्रत्येक नगर के अक्षांश और देशांतर भिन्न होते हैं, इसलिए वहां सूर्योदय का सटीक क्षण अलग होता है। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, वाराणसी या न्यूयॉर्क का राहुकाल समय अलग-अलग आता है।

हाँ। रोजमर्रा के नियमित दफ्तरी काम, पढ़ाई, घरेलू गतिविधियां और पहले से आरंभ हो चुके प्रोजेक्ट राहुकाल में बेझिझक किए जा सकते हैं। केवल एकदम नया काम, गृह प्रवेश या बड़ा आर्थिक फैसला इस समय शुरू नहीं करना चाहिए।

यदि किसी कारणवश यात्रा या महत्वपूर्ण कार्य टालना संभव न हो, तो घर से निकलने से पहले गुड़ या थोड़ा दही ग्रहण करें। भगवान गणेश का स्मरण करें अथवा राहु बीज मंत्र "ॐ रां राहवे नमः" का मानसिक जप करें।

यमगंड काल के स्वामी यमराज हैं। इस कालखंड में आरंभ की गई यात्राएं, नया निवेश या समझौते अक्सर निष्फल होते हैं या भारी देरी का सामना करते हैं। इसलिए दक्षिण भारत के पंचांगों में इसे अत्यंत गंभीरता से टालने योग्य माना जाता है।

गुलिक काल शनि पुत्र गुलिक द्वारा शासित होता है। इस समय किए गए कार्य की पुनरावृत्ति होने की संभावना होती है। इसलिए मकान की नींव डालना या संपत्ति खरीदना शुभ माना जाता है, परंतु कर्ज लेना या बीमारी का इलाज आरंभ करना वर्जित है ताकि वह बार-बार न दोहराना पड़े।

अभिजित मुहूर्त स्थानीय सौर दोपहर के लगभग 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद तक रहता है। यह समय अत्यंत विजयी और दोषहारी माना जाता है। आपात स्थिति में जब कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तब अभिजित मुहूर्त में कार्य किया जा सकता है।

शास्त्रीय वैदिक मुहूर्तों में राहुकाल की गणना केवल दिन के समय (सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच) ही मान्य है। रात्रि के समय शुभ-अशुभ निर्णय रात्रि चौघड़िया एवं होरा चक्र के आधार पर किए जाते हैं।

रविवार के दिन राहुकाल सबसे अंतिम यानी 8वें प्रहर (सूर्यास्त से ठीक पहले लगभग सायं 04:30 से 06:00 बजे) में आता है। वहीं सोमवार को राहुकाल सबसे पहले यानी दूसरे प्रहर (प्रातः 07:30 से 09:00 बजे) में रहता है।

हाँ। बुधवार के दिन राहुकाल 5वें प्रहर में पड़ता है, जो लगभग दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे के बीच होता है। इस समय नया अनुबंध अथवा महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता।

स्थान अनुसार राहुकाल

प्रमुख तीर्थों एवं शहरों के लिए दैनिक राहुकाल

सटीक स्थानीय सूर्योदय और अक्षांश-देशांतर के आधार पर अपने नगर का राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल समय देखें।